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नौ दिनों तक मां दुर्गा के मंत्रों का जाप करें।

मिट्टी के बर्तन में जौ के बीज बोएं और नवमी तक प्रति दिन पानी का छिड़काव करें।

पूर्ण विधि के अनुसार शुभ मुहूर्त में कलश को स्थापित करें। 

यह समय आत्मज्ञान और ईश्वर के करीब जाने का अवसर प्रदान करता है।

यह पूरे विश्व में लोगों के लिए नुकसान देने वाला हो सकता है. भगवती की विदाई मुर्गे पर होगी, जो भी अच्छा नहीं माना जाता. यह लड़ाई और डर पैदा करने वाला संकेत देता है.

इस दौरान क्या करना चाहिए, क्या नहीं पूजा विधि क्या है, जानते हैं सब डिटेल में.

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Gupt Navratri is very crucial for many who are deeply involved with the sector of tantra, yoga, mantra, and sadhana. This is the best time to realize achievements in Exclusive sadhana and to get blessings through the Guru.

अखंड दीपक जलाएं और नौ दिनों तक जलने दें।

इसमें पहले कलश को गंगा जल से भरें, उसके मुख पर आम की पत्तियां लगाएं और उस पर नारियल रखें। 

देवी की कृपा से जीवन से नकारात्मक ऊर्जाओं का नाश होता है।

कलश के ऊपर नारियल रखें। नारियल को लाल वस्त्र में लपेटकर कलावा से बांधें।

कमला : ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद-प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नम:।

पूजा आरंभ करें: दीपक जलाकर देवी का आवाहन करें।

फिर कलश को लाल कपड़े से लपेटें और कलावा के माध्यम से उसे बांधें। 

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